तराई अंचल में स्थित पलिया कलां, लखीमपुर खीरी जनपद की एक महत्वपूर्ण तहसील है जिसके दक्षिण में पवित्रपावनी शारदा नदी अविरल गति से प्रवाहमान है। उत्तर में भारत के विश्व प्रसिद्ध दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक एवं मनोरम छटा इसकी भौगोलिकता को सर्वत्र विखेर रही है। पलिया कलां की अत्यन्त उर्वरा शस्य श्यामला पावन भूमि पर विश्वप्रसिद्ध दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के सन्निकट भारत की प्रसिद्ध नदियों में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाली शारदा नदी के पावन एवं सुरम्य तट के समीप स्थित श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय–पलिया कलां, लखीमपुर खीरी (उ.प्र.) उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है।
महाविद्यालय सुत पावन भगवान शंकर की तपस्थली गोला गोकर्णनाथ (जो छोटी काशी के नाम से विख्यात है) से लगभग 60 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 14 अक्टूबर 1999 ई. को इस महाविद्यालय की स्थापना की गयी। महाविद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण माननीय श्री राजनाथ सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के कर कमलों द्वारा माननीय “पटेल” श्री रामकुमार वर्मा, मंत्री सहकारिता, उ.प्र. सरकार की अध्यक्षता में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार के कार्यकाल में दिनांक 23 अक्टूबर 2001 को सम्पन्न हुआ।
महामहिम राज्यपाल (कुलाधिपति) द्वारा दिनांक 20 जुलाई 2006 को शासन संख्या ई.सा. 9620/जी.एस./6/ द्वारा कला संकाय में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल, गृहविज्ञान विषयों में तथा वाणिज्य संकाय में बीकॉम विषयों की मान्यता की स्वीकृति प्रदान की गयी। श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय–लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से स्थायी रूप से सम्बद्ध है एवं महाविद्यालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U.G.C.) नई दिल्ली की धारा 2(F) एवं 12(B) से सम्बद्ध है।
यह महाविद्यालय उ.प्र. शासन के नियमों के अधीन संचालित है तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए सतत प्रयत्नशील है। महाविद्यालय की स्थापना के समय उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राचार्य के एक पद, कला संकाय के अन्तर्गत प्रवक्ता के सात पद, विषय हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास, गृहविज्ञान, पुस्तकालयाध्यक्ष का एक पद, वरिष्ठ लिपिक का एक पद, कनिष्ठ लिपिक/टंकण का एक पद, पुस्तकालय परिचर का एक पद तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तीन पद स्वीकृत किये गये थे। सन 2004 में वाणिज्य संकाय के अन्तर्गत प्रवक्ता के दो पद तथा सन 2009 में शारीरिक शिक्षा के विषय में प्रवक्ता का एक पद स्वीकृत किया गया।
महाविद्यालय परिसर में कला संकाय एवं वाणिज्य संकाय भवन, विशाल प्रांगण, क्रीड़ागान, व्याख्यान कक्ष, छात्र कॉमन हाल तथा पुस्तकालय भवन कक्ष स्थित है। महाविद्यालय सी.सी.टी.वी. कैमरे व वाईफाई की सुविधा से युक्त है।
महाविद्यालय में नियमित शिक्षा के साथ-साथ अन्य शिक्षणेत्तर गतिविधियों का संचालन भी वर्ष पर्यन्त किया जाता है। सभी विभागों की विषय परिषदों में समसामयिक विषयों पर निबन्ध लेखन, भाषण, वाद-विवाद, स्लोगन लेखन, पोस्टर एवं चार्ट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है तथा प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त छात्र/छात्राओं को पुरस्कृत किया जाता है। महाविद्यालय में प्रतिवर्ष खेलकूद प्रतियोगिताएं एवं रेंजर्स/रोवर्स कार्यक्रम सम्पन्न कराये जाते हैं। सभी राष्ट्रीय पर्व एवं महापुरुषों की जयन्तियां महाविद्यालय में उल्लासपूर्वक मनायी जाती हैं। साथ ही अन्य अवसरों पर विभिन्न प्रकार की विचार गोष्ठियां, वार्तालाप, समूहगान आदि का आयोजन किया जाता है।
महाविद्यालय प्रारम्भ से लेकर अद्यतन पर्यन्त विकास के पथ पर अग्रसर है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कला एवं वाणिज्य संकायों के विभिन्न आयामों को स्थापित करने के प्रति पूर्णतः उन्मुख है और भविष्य में निम्न योजनाओं को कार्यरूप देने हेतु प्रयत्नरत है –
☑ यू०जी०सी० से अनुदान प्राप्ति हेतु प्रयास।
☑ NAAC से मूल्यांकन हेतु प्रयास।
☑ विज्ञान संकाय की स्थापना हेतु प्रयास।
☑ महाविद्यालय अभिलेखों का पूर्ण कम्प्यूटरीकरण।
☑ छात्र/छात्राओं के कल्याण हेतु कार्यक्रमों का संचालन।
☑ N.C.C./N.S.S. की इकाइयों प्रारम्भ करने के सम्बन्ध में प्रयास।
☑ क्रीड़ा स्थल को विकसित करके खेल सुविधाओं में वृद्धि करना।
☑ पुस्तकालय का सुदृढ़ीकरण करना।
☑ महाविद्यालय प्रांगण का सुन्दरीकरण कराना।
☑ महाविद्यालय प्रांगण में पौधारोपण कराना।
☑ महाविद्यालय में परास्नातक कक्षाएं प्रारम्भ कराने हेतु प्रयास।