महाविद्यालय कुलगीत
पलिया की पावन भूमि, महाविद्यालय न्यारा ।
शिक्षा दीप जलाकर करता, सबका पथ उजियारा ।।
विकसित गुरुकुल परम्परा, शिक्षा की अजब प्रणाली है ।
पुष्पित पल्लवित है वसुन्धरा, चन्दन सुरभित हरियाली है ।।
ज्ञान राशि की प्रखर चेतना युत, परिवेश हमारा ।।1।।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की छवि, जन-जन के हृदय पटल में बसी ।
यहीं समीप में शिव की नगरी, कहलाती छोटी काशी ।।
शारदा की लहरों से गूँजे, कल-कल निनाद जलधारा ।।2।।
चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम, या हो सिख्ख या ईसाई ।
सर्वधर्मचेतनानुप्राणित होकर सीखें अच्छाई ।।
गुरुद्वारे में नित प्रति गूँजे, वाहे गुरु का नारा ।।3।।
यहाँ की माटी के कण-कण में, ज्ञानगुंज है भरा हुआ ।
आलोकित हों दिव्य विज्ञान, अम्बर में अरुण ज्यों उदय हुआ ।।
विनय प्रेम के मधुर राग में, मिलता कुलगुण है सारा ।।4।।
बेहतर शिक्षा छात्र ग्रहण कर, सभी नेक इंसान बनें ।
देशभक्ति का भाव जागे, और परहित लक्ष्य महान बने ।।
राष्ट्र अभ्युदय नित प्रति होवे, यह संकल्प हमारा ।।5।।
डॉ० सूर्य प्रकाश शुक्ल